रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) के रेगुलेशन की समीक्षा के लिए RBI के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुदर्शन सेन (Sudarshan Sen) की अध्यक्षता में एक 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी स्ट्रेस्ड लोन के निपटारे (stressed debt resolution) में ARCs द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका और उनके बिजनेस मॉडल को रिव्यू करेगी।


                        



ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनियों के रेगुलेशन की समीक्षा के लिए बनाई गई इस कमेटी में सुदर्शन सेन के अलावा ICICI Bank के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर विशाखा मुले (Vishakha Mulye), SBI के पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पीएन प्रसाद (P N Prasad), MDI में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर रोहित प्रसाद (Rohit Prasad), अरनेस्ट एंड येग के पार्टनर अबिजेर दीवानजी (Abizer Diwanji) और चार्टर्ड अकाउंटेंट आर आनंद (R Anand) शामिल हैं।

यह समिति अपनी पहली बैठक होने बाद उसके 3 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट RBI को सौंप देगी। यह समिति ARCs पर लागू कानून और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा करेगी। साथ ही ARCs की क्षमता को बढ़ाने की सलाह देगी और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (Insolvency & Bankruptcy Code) के तहत स्ट्रेस्ड लोन के रेजोल्यूशन में उनकी भूमिका की समीक्षा करेगी।

क्या काम करता है ARC

आपको बता दें कि फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और लेंडर्स अपने स्ट्रेस्ड यानी डूबे हुए ऐसेट्स ARCs को डिस्काउंट पर बेच देते हैं। लेंडर्स कैश या सिक्योरिटी डिपोजिट लेकर ARCs को स्ट्रेस्ड ऐसेट बेचते हैं। इन रिसिप्ट्स को तब रीडिम किया जा सकता है जब ARCs उस लोन को रिकवर कर लेते हैं।