बाजार नियामक सेबी ने संपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के प्रमुख अधिकारियों और म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिटधारकों के हितों को जोड़ते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों को क्षतिपूर्ति (प्रोत्साहन) का एक हिस्सा उन योजनाओं के यूनिट में हो जिसमें उनकी भूमिका है।


भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि, 'एएमसी के प्रमुख अधिकारियों को मिलने वाले प्रोत्साहन का भुगतान वेतन, भत्तो, बोनस, गैर-नकदी क्षतिपूर्ति (सकल सालाना सीटीसी) का न्यूनतम 20 फीसदी म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिट के रूप में होगा, जिनमें उनकी भूमिका है। सकल सालाना सीटीसी का आकलन आयकर और और अन्य सांविधिक योगदान (पीएफ औरएनपीएस) के बाद किया जाएगा।'




यूनिट के रूप में क्षतिपूर्ति का भुगतान योजनाओं के प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) के अनुपात के रूप में किया जाएगा। इसके लिए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), इंडेक्स फंड, ओवरनाइट फंड और मौजूदा निश्चित अवधि वाली योजनाएं इसमें शामिल नहीं होंगी।


चेयरमैन-सीएमडी की भूमिका अलग करने से कमजोर नहीं होगी प्रवर्तकों की स्थिति
इससे पहले सेबी ने कहा था कि चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों (सीएमडी) की भूमिका को अलग-अलग करने के नए ढांचे का मकसद प्रवर्तकों की स्थिति को कमजोर करना नहीं है। सेबी के प्रमुख अजय त्यागी ने मंगलवार को कहा कि इस नई व्यवस्था से सूचीबद्ध कंपनियों के कामकाज के संचालन के ढांचे में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

अप्रैल की शुरुआत में त्यागी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि इससे किसी एक व्यक्ति के पास बहुत अधिक अधिकारों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भूमिकाओं को अलग करने से संचालन का ढांचा अधिक बेहतर और संतुलित हो सकेगा।

उन्होंने बताया था कि दिसंबर 2020 तक शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों में से करीब 53 फीसदी नियामकीय प्रावधान का अनुपालन कर रही थीं। सेबी ने जनवरी, 2020 में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों की भूमिका को विभाजित करने की व्यवस्था को दो साल के लिए एक अप्रैल, 2022 तक टाल दिया है। कंपनियों की ओर से इसकी मांग की गई थी।