बीते दो हफ्तों में भारतीय बैंकों के लिए संभावित डिफॉल्ट से बचाव की बीमा लागत में 20 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है. कई राज्यों द्वारा आंशिक लॉकडाउन और पाबंदियों के चलते इस लागत में वृद्धि दर्ज की गई है.

                         



आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े डिफॉल्ट बीमा वाले क्रेडिट डिफॉल्ट स्वॉप (सीडीएस) कोरोना वायरस की पहली लहर के स्तर तक पहुंच चुके हैं. सीडीस रेट का असर निजी बैंकों की कमाई अनुमानों को प्रभावित कर सकता है.


बीएनपी परिबा के इंवेस्टमेंट बैंकिंग के प्रमुख गणेशन मुरुगैयन ने कहा, "इस अस्थिरता में भारतीय बैंकों का जोखिम प्रीमियम बढ़ा है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के प्रभाव से कई विदेशी निवेशकों को हैरान किया है. निवेशक काफी करीब से इसके असर को देख रहे हैं."

ब्लूमबर्ग के अनुसार, सोमवार को आईसीआईसीआई बैंक के एक साल के सीडीएस सौदों का भाव 47.42 तक पहुंच गया, जो 12 अप्रैल को 28.35 पर था. सीडीएस के आंकड़े रोजाना अपडेट नहीं किए जाते हैं. इस तरह दो सप्ताह के दौरान सीडीएस में 1,907 बेसिस अंकों का उछाल आया है.

हालांकि, इस दौरान अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी आई है. इसका अर्थ है कि दोनों कर्जदाताओं की जोखिम धारणा में जबरदस्त तेजी आई है. एक विदेशी निवेशकों को आईसीआईसीआई बैंक में हर $100 के जमा के लिए 47.42 सेंट चुकाने होंगे. डिफॉल्ट की स्थिति में यहीं से घाटे की भरपाई होगी.

इस दौरान बीएसई पर आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों ने 10 फीसदी तक की छलांग लगाई. बैंक ने मार्च तिमाही में एसेट क्वालिटी में सुधार दर्ज किया है. सोमवार को भारतीय स्टेट बैंक के एक साल के सीडीएस सौदों का भाव 36.31 तक पहुंच गया, जो 12 अप्रैल को 28.42 की तुलना में 789 बेसिस अंक अधिक है.