ई-कॉमर्स सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए टाटा संस (Tata Sons) चाइनीज ई-कॉमर्स जायंट अलीबाबा की सपोर्ट वाली ऑनलाइन ग्रोसरी कंपनी बिगबास्केट (BigBasket) में मेजोरिटी स्टेक खरीदने जा रही है। इसकी पुष्टि टाटा संस की सहयोगी कंपनी टाटा डिजिटल लिमिटेड (Tata Digital Ltd) द्वारा कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) में जमा की गई एक फाइलिंग में हुई है। इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक, टाटा डिजिटल BigBasket की 64.3% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है।





अगर यह सौदा मंजूर हो जाता है तो नमक से लेकर लग्जरी कार और सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली टाटा ग्रुप इस सेगमेंट में एमेजॉन, वॉलमार्ट की स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिलायंस रिटेल को कड़ी टक्कर देगी। इससे पहले रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि कंपनी बिगबास्केट में अलीबाबा ग्रुप समेत अन्य कंपनियों की 60% हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। टाटा ग्रुप इस सेगमेंट में ऐसे समय में एंट्री मार रही है जब देश में कोविड-19 के कारण ई-कॉमर्स सेल्स खासकर फूड और ग्रोसरीज की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

बिगबास्केट की प्रतिद्वंद्वी कंपनियां अपनो ई-ग्रोसरी बिजनेस में काफी मोटा निवेश करने जा रही है। फ्लिपकार्ट ने घोषणा की है कि वह अपने विस्तार टियर 3 और टियर 4 शहरों में करने जी रही है। वहीं, रिलायंस भी अपने ग्रोसरी बिजनेस को सपोर्ट करने जा रही है। कंपनी ने फेसबुक आर गूगल के 20 बिलियन डॉलर जुटाये हैं।

रोज बुक होते हैं 3 लाख ऑर्डर

टाटा ग्रुप अपने सुपर ऐप (Super App) को जल्द लॉन्च करने वाला है। ऐसे में उसे बिगबास्केट के बड़े हाउसहोल्ड आइटम और ग्रॉसरी प्रोडक्ट्स से अच्छा सपोर्ट मिल सकता है। बिगबास्केट पर प्रतिदिन लगभग 3 लाख ऑर्डर बुक होते हैं।  बिगबास्केट 18 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट्स की बिक्री करता है। हाल ही में इसका ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू एक बिलियन डॉलर को टच किया। लॉकडाउन के पहले फल और सब्जियों की बिक्री 16 से 18% थी, जो अब बढ़कर 20 से 22% हो गई है। टाटा ग्रुप डिजिटल मार्केट में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती है। इसके लिए वह स्नैपडील और इंडिया मार्ट में भी हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है।

बिगबास्केट में इन कंपनियों का बड़ी हिस्सेदारी

बिगबास्केट में सबसे अधिक 29% हिस्सेदारी चीन के उद्योगपति जैक मा (Jack MAA) की कंपनी अलीबाबा ग्रुप की है। बिगबास्केट के दूसरे निवेशकों में अबराज ग्रुप शामिल है, जिसकी हिस्सेदारी 16.3% प्रतिशत, एसेंट कैपिटल की हिस्सेदारी 8.6%, हेलियॉन वेंचर पार्टनर्स की 7%, बेसेम्मर वेंचर पार्टनर्स की 6.2%, मिराई एस्सेट एशिया की हिस्सेदारी 5%, इंटनरेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन की 4.1%, सैंड्स कैपिटल की 4% और CDC ग्रुप की हिस्सेदारी 3.5% है।