भारतीय शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन बिकवाली देखने को मिली जिससे BSE के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और NSE के निफ्टी (Nifty) में करीब 2% की गिरावट आई। दोपहर 1.30 बजे Sensex 1.90% यानी 952.16 अंकों की गिरावट के साथ 49,840.55 अंकों पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, Nifty भी 1.80% यानी 266 अंक टूटकर 14,764.19 अंकों पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स के साथ BSE के मिडकैप में 1.89% औऱ स्मॉल कैप में 1.19% की गिरावट देखने को मिली।




मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट ट्रेंड क्लीयर नहीं है। यब ऊंट किस करवट बैठेगा इसका कोई अंदाजा नहीं है। डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई है और यह 9.16 अंकों पर है जो कैपिटल इनफ्लो (Capital Inflows) के लिए पॉजिटिव संकेत हैं। लेकिन 10 साल वाला यूएस बॉन्ड यील्ड बढ़कर 1.64% के करीब है जो चिंता की बात है।

Geojit Financial Services के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रैटिजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि कोर इंफ्लेशन (Core Inflation) के बढ़ने की कमोडिटी की कीमतें बढ़ना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के नए मामले बढ़ने से भी बाजार प्रभावित हुआ है। उन्होंने निवेशकों को हिदायत दी कि मार्केट वैल्यूएशन अभी हाई है, ऐसे में करेक्शन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 


इन 5 वजहों से आई गिरावट

बॉन्ड यील्ड का बढ़ना

भारत सहित अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इक्विटीज पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है। भारत में अभी 10 साल वाले बॉन्ड की यील्ड 6.20% और अमेरिका में यह 1.64% है। Mywealthgrowth.com के को-फाउंडर हर्षद चेतनवाला ने कहा कि बॉन्ड यील्ड बढ़ने से कंपनियों के कैपिटल का कॉस्ट बढ़ गया है, जिससे उनके स्टॉक्स के वैल्यूएशन पर निगेटिव असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर सेंट्रल बैंक बॉन्ड यील्ड को बढ़ने देती है तो इसका मतलब यह है कि लिक्विडिटी सपोर्ट कम हो जाएगा। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ता है तो निवेशक इक्विटी में बिकवाली कर बॉन्ड में निवेश करने लग जाते हैं।


महंगाई की चिंता

बाजार में गिरावट की दूसरी वजह एक्सेस लिक्विडिटी और बॉन्ड यील्ड बढ़ने की वजह से महंगाई बढ़ने की आशंकाएं हैं। अमेरिकी में जारी राहत पैकेज के कारण भी महंगाई बढ़ सकती है। वहीं, भारत में फरवरी में CPI बढ़कर 5.03% गया जो जनवरी में 4.1% था। इससे इकोनॉमिक रिवाइवल को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।


ग्रोथ में गिरावट

जनवरी में भारत के इंडस्ट्रियल ग्रोथ (IIP) में 1.6% की गिरावट आई, इससे निवेशकों के मन में यह बात बैठ गई कि ग्रोथ अपना मोमेंटम लूज कर रहा है। मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग में गिरावट आने के कारण IIP गिरा है। इससे भी बाजार पर निगेटिव इंपैक्ट पड़ा।


कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी

भारत सहति दुनियाभर के कई देशों में कोरोना वायरस माहामारी के नए मामले तेजी से बढ़े हैं। भारत में 14 मार्च को कोरोना के 25,320 नए मामले सामने आए। यह पिछले 84 दिनों में नए मामलों की सबसे अधिक संख्या है। इस वजह से महाराष्ट्र के कई शहरों में फिर से लॉकडाउन लग गया है। इससे कोरोना के एक और वेव का डर सताने लगा है। इससे भी बाजार गिरा है।


टेक्निकल वजह

बाजार में गिरावट की टेक्निकल वजहें भी हैं। निफ्टी ने अपना 14,800 का सपोर्ट को दिया है और यह 14,500 के लेवल पर आ सकता है।  LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रोहित सिंगरे ने कहा कि जब तक यह 15,200 के ऊपर नहीं पहुंचता, तब तक बाजार में स्टेबिलिटी नहीं आएगी। मार्केट एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को लार्ज पोजीशन लेने में सतर्कता बरतने के लिए कहा है। उनका कहना है कि बाजार में अभी अस्थिरता रहेगी।