केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने कहा कि एयर इंडिया (Air India) को लेकर सरकार के सामने सिर्फ दो विकल्प हैं, उसे बंद कर दिया जाए या फिर पूरी तरह से प्राइवेट कर दिया जाए. सरकार ने दूसरा विकल्प चुना. पुरी ने शनिवार को कहा कि एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी.




60,000 करोड़ के कर्ज में डूबी एयर इंडिया

उन्होंने ANI से कहा, 'हमने यह फैसला किया है कि एयर इंडिया में सरकार अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी. हमारे पास प्राइवेट करने या ना करने का विकल्प नहीं था. बल्कि ये विकल्प था कि इसे प्राइवेट कर दिया जाए या फिर कामकाज बंद कर दिया जाए. एयर इंडिया फर्स्ट रेट एसेट है लेकिन इस पर 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया है. हमें कर्ज का बोझ खत्म करना है.'

इससे पहले शुक्रवार को हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के लिए नए टाइमलाइन पर काम कर रही है. आने वाले कुछ दिनों में एयर इंडिया के विनिवेश के लिए बोलियां मंगाई जाएंगी.

मई-जून तक बिक जाएगी एयर इंडिया? 

उन्होंने कहा, 'एयर इंडिया सरकार की अकेले की मिल्कियत है. वह इसमें अपनी 100 की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए खरीदार तलाशने में लगी है.' उन्होंने आगे कहा कि सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया था कि शॉर्टलिस्ट हुई कंपनियों को यह बताया जाएगा कि 64 दिनों के भीतर बीडिंग करना होगा. इस बार सरकार पूरी तरह तैयार है. उसे कोई हिचक नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मई या जून तक एयर इंडिया को बेच दिया जाएगा.

कांग्रेस को बताया कंफ्यूज्ड पार्टी

उन्होंने निजीकरण का विरोध करने वाली कांग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कांग्रेस कन्फ्यूज्ड पार्टी है. उन्हेंने (अपने समय में) जो कुछ एक-दो अच्छे काम किए उनमें दो (दिल्ली और मुंबई के) हवाई अड्डों का निजीकरण था. दिल्ली और मुंबई सफलता का उदाहरण हैं.

बता दें कि मुनाफे में चलने वाली इंडियन एयरलाइंस का एयर इंडिया में 2007 में विलय कर दिया गया. उसके बाद यह घाटे में डूबती गई.