अनिल अंबानी और उनकी ग्रुप की तमाम कंपनियां बुरे दौर से गुजर रही हैं. रिलायंस कैपिटल एकबार फिर से बिना कंवर्ट होने वाले डिबेंचर (NCDs) के लिए इंट्रेस्ट का भुगतान करने में असफल रही. इंट्रेस्ट का भुगतान 21 फरवरी को करना था जो कंपनी नहीं कर पाई. यह लगातार 49वां मौका था जब रिलायंस कैपिटल डिफॉल्टर हुई है.


                             

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर तिमाही रिजल्ट में कंपनी की तरफ से कहा गया कि कंपनी के ऊपर 14,827 करोड़ का नॉन कंवर्टेबल डिबेंचर का बोझ है. कंपनी कर्ज के भुगतान के लिए असेट मोनेटाइजेशन यानी अपनी संपत्ति को बेचने की योजना पर काम कर रही है और इसके लिए बोलीदाताओं से बातचीत जारी है. कंपनी ने पिछले दिनों अपनी संपत्ति की बिक्री के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट यानी EOI भी मंगवाया था. फिलहाल किसी भी डील पर आखिरी मुहर नहीं लग पाई है.


HDFC, Axis बैंकों के 11 किस्तों का भुगतान नहीं किया गया

Reliance Capital पर कर्ज का भारी भरकम बोझ है. कंपनी ने 31 जनवरी 2020 से 30 जनवरी 2021 के बीच एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के 11 किस्तों का भी भुगतान नहीं किया है. कंपनी को हर महीने 4.77 करोड़ एचडीएफसी को और 71 लाख एक्सिस बैंक को केवर इंट्रेस्ट के रूप में भुगतान करना है. कंपनी ने एचडीएफसी से 524 करोड़ और एक्सिस बैंक से 101 करोड़ का लोन लिया है. एचडीएफसी का इंट्रेस्ट रेट 10.60 फीसदी है, जबकि एक्सिस बैंक का इंट्रेस्ट रेट 13 फीसदी है. कंपनी पर बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन का कुल कर्ज 706 करोड़ रुपए है.


कुल वित्तीय बोझ 20511 करोड़

कंपनी पर कुल वित्तीय बोझ 20511 करोड़ रुपए का है. दिसंबर तिमाही का रिजल्ट सामने आ चुका है और इस तिमाही में कंपनी को कुल 4018 करोड़ का घाटा हुआ है. पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का कुल घाटा महज 135 करोड़ रहा था. कर्ज भुगतान के मामले में कंपनी की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केयर रेटिंग एजेंसी ने सितंबर 2019 में रिलायंस कैपिटल के 17000 करोड़ कर्ज को ‘D’ ग्रेड डिफॉल्ट में डाल दिया था.