CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि भारत सरकार नें Cairn Energy के 1.2 अरब डॉलर के आर्बिटरेशन अवार्ड के खिलाफ अपील करने का फैसला लिया है।

                                

केयर्न एनर्जी का टॉप मैनेजमेंट 19 फरवरी को एक बार फिर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मिलेगा। बता दें कि (cairn energy)  कल भी इनकी वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात हुई थी।

इस मुद्दे पर एक सरकारी ने कहा है कि अपने कर लगाने के संप्रभु अधिकार के लिए केयर्न एनर्जी के खिलाफ अलग-अलग international courts में अपना वाद दाखिल करेगी। अपनी तरफ से सरकार केयर्न एनर्जी (Cairn Energy) के सुलह की कोशिशों की प्रशंसा करती है। केयर्न एनर्जी के साथ सुलह की कोई भी कोशिश देश के वर्तमान कानूनों के तहत होनी चाहिए।

बता दें कि कल Cairn Energy के CEO साइमन थॉमसन (Simon Thomson) ने वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। थॉमसन ने इस मुद्दे पर वित्त सचिव (Finance Secretary) अजय भूषण पांडे, CBDT के अध्यक्ष पीसी मोदी और वित्त मंत्रालय के अन्य अधिकारियों से बातचीत की थी। इस मुलाकात का  (cairn energy)मकसद विवादास्पद रिट्ऱॉस्पेक्टिव टैक्स के मुद्दे का कोई मैत्रीपूर्ण जल्द से जल्द समाधान ढ़ूढ़ना था।

हालांकि इस मीटिंग में भाग लेने वालों ने मीटिंग के निष्कर्ष पर कुछ कहने इंकार कर दिया था लेकिन मामले पर नजदीकी से नजर रखने वाले एक सूत्र ने मनीकंट्रोल के बताया था सरकार इस मुद्दे को सुलझाना चाहती है।

बता दें कि भारत को दिसंबर, 2020 में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता (international arbitration ) में केयर्न एनर्जी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। टैक्स विवाद (Tax Dispute) के इस मामले में मध्यस्थता अदालत ने भारत सरकार को 1.2 बिलियन डॉलर के अलावा इंटरेस्ट और पेनाल्टी की रकम चुकाने  (cairn energyका आदेश दिया था, जिससे यह रकम बढ़कर 1.4 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई।