वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, सरकार एक क्रिप्टोकरेंसी बिल (Cryptocurrency Bill) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) को भेजा जाएगा. साल 2018 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) से संबंधित लेनदेन बैंकों को प्रतिबंधित कर दिया था. हालांकि, पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध हटा दिया था. देश में क्रिप्टोकरेंसी के लिए पर्याप्त कानून नहीं है. ऐसे में सरकार क्रिप्टो करेंसी पर कुछ और कानून बनाने पर विचार कर रही है.




बता दें कि सरकार ने 17वीं लोकसभा के बजट सत्र में एक बिल सूचीबद्ध किया था, जिसमें भारत के सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन (Bitcoin), ईथर (Ether), Ripple को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है.

क्यों लग रही है क्रिप्टोकरेंसी पर रोक?

25 जनवरी को जारी बुकलेट में आरबीआई ने कहा था कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी और उसके साथ आने वाले रिस्क को लेकर सावधान है. लेकिन मौजूदा समय में करेंसी के डिजिटलाइजेशन के (Cryptocurrency Bill) विकल्प के बारे में सोचा जा रहा है.क्रिप्टोकरेंसी एक विकेंद्रीकृत भुगतान प्रणाली है. इसका मतलब ये पारंपरिक मुद्रा की तरह किसी केंद्रीय बैंक द्वारा रेगयुलेट नहीं की जाती. इस वजह से आरबीआई जैसे केंद्रीय बैंकों के लिए यह चिंता का विषय है. आरबीआई की तरह यूरोपियन सेंट्रल बैंक को भी क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ चेतावनी जारी की है.

कितने तरह की होती है क्रिप्टोकरेंसी 

डिजिटल या क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं. बिटकॉइन के अलावा दुनिया में(Cryptocurrency Bill)  सैकड़ों अन्य क्रिप्टो करेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो.

क्रिप्टोकरेंसी का मुनाफा काफी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है. क्रिप्टो (Cryptocurrency Bill)  करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता. साल 2009 में जब बिटकॉइन को लांच किया गया था तब उसकी वैल्यू शून्य डॉलर थी. 2010 में भी इसकी वैल्यू 1 डॉलर तक नहीं पहुंची. लेकिन आज बिटकॉइन का रेट 44,000 डॉलर है.