बढ़ती महंगाई (Inflation) से आम आदमी की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पेट्रोल-डीजल, सब्जी और एलपीजी सिलेंडर महंगा होने के बाद अब दूध (Milk) की बारी है. दूध उत्पादकों ने मांग की है कि दूध के दाम 55 रुपये लीटर तक बढ़ा दिए जाएं क्योंकि महंगे पेट्रोल-डीजल की वजह से उनके आर्थिक हालात खराब हो गए हैं.


                        



महंगाई ने बिगाड़ा बजट

दूध के उत्पादकों की दलील है कि बढ़ती महंगाई की वजह से पशुओं का चारा भी बहुत महंगा हो गया है. यातायात शुल्क में भी बढ़ोतरी हो गई है जिसका असर पशुओं की कीमत पर भी पड़ रहा है. अब एक अच्छी भैंस खरीदने के लिए 1 से 1.5 लाख रुपयों तक की जरूरत होती है जिसकी वजह से पशुपालन में काफी दिक्कतें आ रही हैं.


2 साल से नहीं बढ़े हैं दूध के दाम

 प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हीरालाल चौधरी ने कहा कि मंगलवार को 25 गांवों की एक बैठक हुई जिसमें हमारी मांग थी कि दूध के दाम बढ़ाए जाएं. दूध उत्पादकों ने 2020 में भी दूध के दाम बढ़ाने की मांग की थी लेकिन कोरोना वायरस की वजह से दूध के दाम नहीं बढ़ाए गए थे. इस वजह से दूध उत्पादकों को आज भी उतने रुपये में दूध बेचना पड़ रहा है जितने में वो 2 साल पहले बेचते थे. अब दूध के दामों को बढ़ाने की मांग फिर से हो रही है. इसके लिए 25 गांव के दूध उत्पादकों ने एक बड़ी बैठक की और अगले महीने की पहली तारीख से दूध के दाम 55 रुपये लीटर तक बढ़ाने की मांग की. 


दाम नहीं बढ़ाए तो होगी दिक्कत

दूध उत्पादकों ने साफ कर दिया है कि अगर दूध के दाम नहीं बढ़ाए गए तो दूध की आपूर्ति (Supply) रोक देंगे. दूध उत्पादकों की इस चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जा सकता है क्योंकि अगर दूध की सप्लाई रुकी तो कोहराम मच जाएगा. एक बात और भी है ऐसा नहीं है कि रतलाम के दूध उत्पादकों की मांग का असर केवल आस-पास के इलाकों में ही पड़ेगा. अगर रतलाम के दूध उत्पादकों की मांग मान ली जाती है तो देश के दूसरे हिस्सों में भी इसका असर पड़ना तय है क्योंकि वहां भी इस तरह की मांग जरूर उठेगी.